इस विषय को समझने से पहले दोनों हस्तियों को जानना जरूरी है:
यह बहस तकनीकी रूप से एक "संवाद" थी, लेकिन इसमें एकतरफा हमले के कई संकेत मिलते हैं। नीचे दोनों पक्षों की रणनीति और प्रमुख बातों पर विस्तार से चर्चा की गई है:
: डॉ. नाइक ने तर्क दिया कि धर्म की परिभाषा सत्य और असत्य के बीच के अंतर पर आधारित होनी चाहिए। श्री श्री रवि शंकर ने तर्क दिया कि धर्म की परिभाषा प्रेम, सहिष्णुता और समझदारी पर आधारित होनी चाहिए।
डॉ. नाइक के समर्थकों का दावा है कि उन्होंने तार्किक रूप से हिंदू ग्रंथों के उद्धरण प्रस्तुत किए, जिसका दूसरा पक्ष सीधे तौर पर शास्त्रों के आधार पर उत्तर नहीं दे सका। dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi
हाँ, यह 21 जनवरी 2006 को बेंगलुरु में एक सार्वजनिक मंच पर हुई थी। यह एक "इंटर-फेथ डायलॉग" था न कि पारंपरिक प्रतिस्पर्धात्मक बहस।
यदि आप इस पूरी बहस को देखना या सुनना चाहते हैं, तो निम्नलिखित माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:
यह बहस लगभग चार घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें दोनों वक्ताओं के प्रस्तुतीकरण के बाद प्रश्न-उत्तर (Q&A Session) का दौर भी शामिल था। for: "Zakir Naik vs Sri Sri Ravi Shankar"
इस वीडियो को हिंदी में पूरा कहाँ और कैसे देखें?
for: "Zakir Naik vs Sri Sri Ravi Shankar" – You may find clips of them speaking on similar topics, but no debate.
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इंटरनेट पर सर्च करने वाले कई उपयोगकर्ताओं के मन में एक जिज्ञासा बनी रहती है: "क्या डॉ. ज़ाकिर नाइक और श्री श्री रवि शंकर के बीच कभी कोई सार्वजनिक बहस (Debate) हुई है?" यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर "Dr. Zakir Naik vs Sri Sri Ravi Shankar debate full in hindi" जैसे कीवर्ड्स की खूब खोज होती है।
डॉ. नाइक ने हिंदू धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर वेदों और उपनिषदों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि हिंदू धर्म का मूल दर्शन भी एक ही ईश्वर की पूजा करना है। उन्होंने श्वेताश्वतरोपनिषद (6:9) का उदाहरण दिया: "न तस्य कश्चित् पतिरस्ति लोके..." जिसका अर्थ है कि उस ईश्वर का कोई माता-पिता या स्वामी नहीं है। 2. मूर्ति पूजा का खंडन