यदि आपत्ति खारिज हो जाती है या देनदार राशि नहीं चुकाता, तो धारा 13 और इसके बाद के प्रावधानों के तहत निम्नलिखित तरीकों से वसूली की जा सकती है:
: Includes any arrears of revenue, taxes, or money due to the government or local authorities.
प्रमाणपत्र जारी करना (Section 4 & 6):
यहाँ (Bihar and Orissa Public Demand Recovery Act, 1914) की मुख्य धाराओं और प्रक्रिया पर आधारित एक कहानी दी गई है, जो इस कानून के प्रावधानों को सरल भाषा में समझाती है ।
नगर निगमों, जिला परिषदों या अन्य वैधानिक निकायों का बकाया धन।
किसी सरकारी विभाग, स्थानीय प्राधिकरण, या सरकारी उपक्रम का बकाया।
सर्टिफिकेट जारी होने के बाद देनदार को धारा 7 के तहत नोटिस भेजा जाता है। पटना हाईकोर्ट के अनुसार, वसूली को वैध बनाने के लिए इस नोटिस की तामील अनिवार्य है। आपत्ति दर्ज करना (Section 9): नोटिस मिलने के 30 दिनों
यह समझना जरूरी है कि सरकार इस अधिनियम के अंतर्गत कैसे कार्य करती है। आइए, कुछ महत्वपूर्ण धाराओं पर नजर डालते हैं:
इस कानून का महत्व और वर्तमान प्रासंगिकता
इस लेख में हम इस अधिनियम के इतिहास, मुख्य धाराओं, सरकारी बकाया वसूली की प्रक्रिया और इसके कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
यह कानून ब्रिटिश काल के दौरान 1914 में लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार या सरकारी संस्थानों के बकाया धन (जैसे लगान, ऋण, अदालती फीस, स्थानीय कर आदि) को शीघ्र और प्रभावी ढंग से वसूल करना है। साधारण नागरिक मामलों में बकाया वसूली के लिए लंबी अदालती प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, लेकिन इस विशेष अधिनियम के तहत लोक मांग (Public Demand) की वसूली के लिए एक संक्षिप्त और त्वरित (Summary Procedure) प्रक्रिया प्रदान की गई है।
यहां सिंचाई का सिस्टम (नहरें) बंगाल से अलग था और राजस्व वसूली के तरीकों में भी अंत
अधिनियम का पूरा टेक्स्ट हिंदी में समझने के लिए, आप आधिकारिक स्रोतों का उपयोग कर सकते हैं। चूंकि यह एक पुराना कानून है, इसलिए इसके हिंदी अनुवाद के लिए आप Board of Revenue Bihar, Patna की वेबसाइट पर यूजर मैनुअल देख सकते हैं, जो PDR Act की कार्यप्रणाली को हिंदी में स्पष्ट करता है।