Salo Or The 120 Days Of Sodom Movie In Hindi Online
यह फिल्म केवल मनोरंजन के लिए नहीं बनाई गई है, बल्कि यह निरंकुश शक्ति, भ्रष्टाचार और फासीवाद के प्रति एक राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणी है। इसे सिनेमा के इतिहास में सबसे अधिक विवादास्पद और परेशान करने वाली फिल्मों में गिना जाता है।
क्या यह फिल्म हिंदी में उपलब्ध है?
("Extreme Themes in Literature and Cinema: A Perspective on The 120 Days of Sodom and Salo")
फिल्म दिखाती है कि जब सत्ता पूरी तरह से अनियंत्रित हो जाती है, तो वह आम इंसानों को केवल उपभोग और विनाश की वस्तु बना देती है। salo or the 120 days of sodom movie in hindi
भारत के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के कड़े नियमों के तहत इस फिल्म को भारत के सिनेमाघरों या टेलीविजन पर कभी प्रदर्शित नहीं किया जा सकता।
भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के सख्त नियमों के कारण इस फिल्म को भारत में कभी भी सिनेमाघरों या टेलीविजन पर दिखाने की अनुमति नहीं मिल सकती। भारत में अत्यधिक यौन हिंसा और क्रूरता दिखाने वाली फिल्मों पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
फिल्म की कहानी चार शक्तिशाली और भ्रष्ट इतालवी अधिकारियों (एक ड्यूक, एक बिशप, एक मजिस्ट्रेट और एक राष्ट्रपति) के इर्द-गिर्द घूमती है। वे 18 किशोर लड़के-लड़कियों का अपहरण करते हैं और उन्हें एक महल में ले जाते हैं। वहाँ 120 दिनों तक वे उन पर अकल्पनीय मानसिक और शारीरिक अत्याचार करते हैं। While an official Hindi dub does not exist,
There is no official Hindi dubbed release of Salo . Due to the film's highly explicit nature, extreme violence, and sensitive themes, mainstream Indian distribution companies and streaming platforms do not host or dub the movie.
While an official Hindi dub does not exist, unofficial Hindi SRT (subtitle) files created by independent translators can occasionally be found on third-party subtitle platforms. However, most viewers watch the film in its original Italian audio with English subtitles.
इस फिल्म से जुड़ा सबसे बड़ा और दुखद विवाद यह है कि इसके प्रीमियर से कुछ ही हफ्ते पहले, इसके निर्देशक कर दी गई थी। कई लोगों का मानना है कि इस फिल्म में फासीवाद और शक्तिशाली लोगों पर किए गए तीखे हमले के कारण ही उनकी जान ली गई। बल्कि यह निरंकुश शक्ति
सतही तौर पर देखने पर यह फिल्म केवल अत्यधिक हिंसा और अश्लीलता लग सकती है, लेकिन निर्देशक पिएर पाओलो पासोलिनी का उद्देश्य दर्शकों को केवल चौंकाना या डराना नहीं था। पासोलिनी एक मार्क्सवादी विचारक थे और उन्होंने इस फिल्म का उपयोग एक गहरे राजनीतिक रूपक (Metaphor) के रूप में किया था:
पासोलिनी का सिनेमाई और राजनीतिक संदेश
फिल्म को चार चरणों (Circles) में बांटा गया है, जो डांटे की कृति 'डिवाइन कॉमेडी' से प्रेरित है, लेकिन इसमें नरक (Hell) को ही दिखाया गया है:
'सालो' को रिलीज होते ही कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया था। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और खुद इटली में इसे लंबे समय तक बैन रखा गया। फिल्म के रिलीज होने के कुछ ही हफ्तों बाद निर्देशक पासोलिनी की रहस्यमय तरीके से हत्या कर दी गई थी, जिससे इस फिल्म के साथ एक डरावना इतिहास और जुड़ गया।